Modi Govt @ 8

Modi Govt @ 8:रोजगार देने के मामले में नरेंद्र मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल के समय से ही विपक्ष के निशाने पर रही है। बीते आठ साल के दौरान देश में बेरोजगारी दर में इजाफा देखने को मिला है। साल 2014 में यह 5.60 फीसदी थी, जबकि सीएमआईई के ताजा आंकड़े देखें तो अप्रैल 2022 में बेरोजगारी दर बढ़कर 7.83 फीसदी पर पहुंच गई है।

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को आठ साल पूरे हो चुके हैं। इस अवधि में देश की अर्थव्यवस्था में भी बड़े बदलाव देखने को मिले। एक ओर देश की आर्थिक हालत बहुत बेकार नजर आई जिससे देश मैं बेरोजगारी भुखमरी जैसे हालत कर दी है वहीँ दूसरी तरफ कोरोना का काला साया भी पड़ा इसकी वजह से भी देश को बहुत नुकसान हुआ है । आर्थिक स्तर पर देखें तो जहां मोदी शासन में देश ने नए मुकाम हासिल किए, तो कई मोर्चों पर निराशा हाथ लगी। आठ सालों में आर्थिक इस्थिति बहुत बिगड़ी है देश की जनता की (Modi Govt @ 8)

क्या रही देश की जीडीपी

26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री का पद संभाला। उस वक्त देश की जीडीपी वृद्धि की दर 7.4 फीसदी थी। 2016 तक इसमें इजाफा हुआ। उस वक्त ये बढ़कर 8.3 फीसदी तक पहुंच गई। 2017 से इसमें गिरावट आनी शुरू हो गई। 2019 में जीडीपी वृद्धि दर घटकर चार फीसदी पर पहुंच गई। 2020 में कोरोना के असर के चलते जीडीपी वृद्धि दर नकारात्मक हो गई। उस वक्त ये दर -7.3 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई। तब भारत की जीडीपी 112 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा थी। आज भारत की जीडीपी 232 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है।

मोदी राज मैं कितनी बड़ी महंगाई दर

अप्रैल 2022 में देश में खुदरा महंगाई दर 7.79 फीसदी हो गई है। ये आठ साल का उच्चतम स्तर है। वहीं, थोक महंगाई भी तेजी से बढ़ते हुए 15 फीसदी के स्तर को पार कर गई है। साल 2014 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद नरेंद्र मोदी ने जब प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, उस समय खुदरा महंगाई दर 8.33 फीसदी थी।

रोजगार देने के मामले मैं फैल रही मोदी सरकार

रोजगार देने के मामले में नरेंद्र मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल के समय से ही विपक्ष के निशाने पर रही है। बीते आठ साल के दौरान देश में बेरोजगारी दर में इजाफा देखने को मिला है। साल 2014 में बेरोजगारी दर की बात करें तो यह 5.60 फीसदी थी, जबकि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के ताजा आंकड़ों को देखें तो अप्रैल 2022 में देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 7.83 फीसदी पर पहुंच गई है। इससे पिछले महीने मार्च में यह 7.60 फीसदी रही थी देश मैं बढ़ती बेरोजगारी के कारण देश बहुत पिछड़ गया है ।

डॉलर के मुकाबले रुपया मैं हुई बहुत गिराबट

सत्ता मैं आने से पहले मोदी जी ने ही कहा था जिस देश का रूपया कमजोर होता है उस देश की सरकार कमजोर होती है
महंगाई के पीछे डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा में आ रही गिरावट का बड़ा योगदान है। मंगलवार 22 मई को रुपया डॉलर के मुकाबले टूटकर 77.59 के निचले स्तर तक पहुंच गया। बीते दिनों रुपये ने डॉलर के मुकाबले अपने सर्वकालिक निम्न स्तर को छुआ था और 77.70 तक टूट गया था। वहीं बात करें मोदी के सत्ता संभालने से पहले की, तो 24 मई 2014 को डॉलर के मुकाबले रुपया 58.39 के स्तर पर था।

पेट्रोल और डीजल ने भी किया निराश

मई 2014 में देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 71.41 रुपये प्रति लीटर थी, जो कि 24 मई को 96.72 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुकी है, जबकि सरकार ने हाल ही में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में कटौती कर जनता को राहत दी है। डीजल की बात करें तो मई 2014 में 55.49 रुपये प्रति लीटर की दर से बिकता था, जो अब 89.62 रुपये प्रति लीटर हो चुका है।(Modi Govt @ 8)
देश की जनता का कहना है 50 रुपये बड़ा कर 10 रुपये कम करदेने से कोई राहत नहीं होती
इन 8 सालों मैं गैस सिलेंडर के दामों मैं भी भारी इजाफा हुआ है जिसकी वजह से गरीबों का बजट ही ख़राब हो गया है जो सिलेंडर 2014 मैं 293 रुपये का आता था आज वहीँ गैस सिलेंडर 1000 रुपये से ज्यादा का आता है

मोदी सरकार मैं किसका हुआ फायदा

भाजपा सरकार के आने के बाद देश के कुछ चुनिन्दा उद्द्योगपतियों का फायदा हुआ है जैसे अडानी, अम्बानी, रामदेव, आदि उद्द्योगपतियों का फायदा हुआ है इन्ही लोगों के कारोबार मैं बहुत इजाफा हुआ है जिसका असर सीधा आम आदमी की जेब पर पड़ा है